Sunday, 5 June 2016

उम्र छोटी, दिल बड़ा हो जाए फ़िर से

उम्र छोटी, दिल बड़ा हो जाए फ़िर से,
बोलूँ फ़िर से वो तुतलाती बोली,
रंग लूँ गालों पर गुलाल लाल,
रंगों से भरी फ़िर से खेलूँ होली,
काश लौट आएं वो सारे दोस्त,
जुड़ जाए फ़िर जैसे दामन-चोली,
काश लौट आए वो भी,
जो सचमुच थी बहुत भोली,
फिर उसे रंगने चले हम मलंगो की टोली,
नज़र रहती थी उसकी मुझ पर इस कदर,
जैसे भरती ना हो उसके दिल की झोली,
जब हम मिले थे, तो कुछ यूँ बोली,
अगर चाहत ना थी मुझसे,
तो मेरी ज़िंदगी क्यों टटोली,
अगर चाहते थे तुम भी,
तो ये राज़ की चिठ्ठी क्यों ना खोली,
चार दिन की ज़िंदगी थी मेरी,
वो भी तुम्हारे बिना ही खो ली,
दिल में बसोगे सिर्फ तुम ही,
बेशक बना ली मैने नई टोली,
उम्र छोटी दिल बड़ा हो जाए फ़िर से,
बोलूँ फ़िर से वो तुतलाती बोली....!

लोग उसे चाँद कहते हैं

लोग उसे चाँद कहते हैं, लोगों का भी अजब खयाल है
मुझे वो चाँद लगती ही नहीं, यही तो मेरा सवाल है
वो चाँद हो ही नहीं सकती यारो, उसका चेहरा तो सूरज की तरह लाल है
उसके तो गोरे गोरे गाल और मतवाली चाल है
जाने खुदा ने उसे बनाने में लिए कितने साल हैं
हमको बनाया मिट्टी से, उसमे लगाया कौन सा माल है
जब भी करूँ मिलने की कोशिश, तो हँस कर देती टाल है
यह मैं भी जानता हूँ, यह उसकी एक चाल है
एक दिन मैं उससे मिला, पूछा, मेरे बारे में क्या खयाल है
उसका कहना था, आप आदमी बेमिसाल हैं, लगते कमाल हैं
पर साथ में उसने कहा, आप तो मेरा भविष्यकाल हैं
मैने पूछा वर्तमान नहीं, यह कैसा बवाल है
उसने कहा, वर्तमान हम उनके हैं जिनके हम लगते लाल हैं
मेरे माता पिता हमेशा मुझे देते आपकी मिसाल हैं
आप शरीफ़ हैं बचकर रहना, हम बड़े वाचाल हैं
दुनिया बुरी व चुगलखोर है, ओढे शराफत की खाल है
बस उसी दिन से उसने मुझ पर डाल दिया प्यार का जाल है
उसका कहना दुनिया बुरी, पर वो फूलों की डाल है
उसकी इन प्यारी बातों ने कर दिया दिल खुशहाल है
लोग उसे चाँद कहते हैं लोगों का भी अजब खयाल है
मुझे वो चाँद लगती ही नहीं, यही तो मेरा सवाल है
वो चाँद हो ही नहीं सकती, उसका चेहरा तो सूरज की तरह लाल है....!