उम्र छोटी, दिल बड़ा हो जाए फ़िर से,
बोलूँ फ़िर से वो तुतलाती बोली,
रंग लूँ गालों पर गुलाल लाल,
रंगों से भरी फ़िर से खेलूँ होली,
काश लौट आएं वो सारे दोस्त,
जुड़ जाए फ़िर जैसे दामन-चोली,
काश लौट आए वो भी,
जो सचमुच थी बहुत भोली,
फिर उसे रंगने चले हम मलंगो की टोली,
नज़र रहती थी उसकी मुझ पर इस कदर,
जैसे भरती ना हो उसके दिल की झोली,
जब हम मिले थे, तो कुछ यूँ बोली,
अगर चाहत ना थी मुझसे,
तो मेरी ज़िंदगी क्यों टटोली,
अगर चाहते थे तुम भी,
तो ये राज़ की चिठ्ठी क्यों ना खोली,
चार दिन की ज़िंदगी थी मेरी,
वो भी तुम्हारे बिना ही खो ली,
दिल में बसोगे सिर्फ तुम ही,
बेशक बना ली मैने नई टोली,
उम्र छोटी दिल बड़ा हो जाए फ़िर से,
बोलूँ फ़िर से वो तुतलाती बोली....!
बोलूँ फ़िर से वो तुतलाती बोली,
रंग लूँ गालों पर गुलाल लाल,
रंगों से भरी फ़िर से खेलूँ होली,
काश लौट आएं वो सारे दोस्त,
जुड़ जाए फ़िर जैसे दामन-चोली,
काश लौट आए वो भी,
जो सचमुच थी बहुत भोली,
फिर उसे रंगने चले हम मलंगो की टोली,
नज़र रहती थी उसकी मुझ पर इस कदर,
जैसे भरती ना हो उसके दिल की झोली,
जब हम मिले थे, तो कुछ यूँ बोली,
अगर चाहत ना थी मुझसे,
तो मेरी ज़िंदगी क्यों टटोली,
अगर चाहते थे तुम भी,
तो ये राज़ की चिठ्ठी क्यों ना खोली,
चार दिन की ज़िंदगी थी मेरी,
वो भी तुम्हारे बिना ही खो ली,
दिल में बसोगे सिर्फ तुम ही,
बेशक बना ली मैने नई टोली,
उम्र छोटी दिल बड़ा हो जाए फ़िर से,
बोलूँ फ़िर से वो तुतलाती बोली....!